डिब्रूगढ़, 3 जून: केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश के तिराप, चांगलांग और लोंगडिंग (टीसीएल) जिलों में भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी का कार्य शुरू कर दिया है। लंबे समय से उग्रवाद प्रभावित माने जाने वाले इस क्षेत्र में सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि सीमा को सुरक्षित करने से उग्रवादी संगठनों की गतिविधियों पर प्रभावी रोक लग सकेगी। पूर्वोत्तर के कई उग्रवादी समूह म्यांमार स्थित ठिकानों का उपयोग कर जंगलों के रास्ते भारतीय सीमा में प्रवेश करते रहे हैं।
भारत और म्यांमार के बीच 1,643 किलोमीटर लंबी सीमा है, जिसमें सबसे बड़ा हिस्सा अरुणाचल प्रदेश के पास है। अधिकारियों के अनुसार, चांगलांग जिले के पांगसाउ पास क्षेत्र में नवंबर 2025 से शुरू हुआ बाड़बंदी का कार्य खराब मौसम और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद जारी है। इस परियोजना को बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) द्वारा सुरक्षा बलों की निगरानी में अंजाम दिया जा रहा है।
केंद्र सरकार ने पूरी भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़बंदी और संबंधित बुनियादी ढांचे के विकास के लिए लगभग 31,000 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद उग्रवादी संगठनों की सीमा पार आवाजाही, आपूर्ति नेटवर्क और उगाही गतिविधियों को बड़ा झटका लगेगा, जिससे पूर्वोत्तर में शांति और सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
